कैंसर जितनी जल्दी पकड़ में आए, इलाज उतना ही आसान होता है। पूर्वांचल में बहुत से मरीज तब आते हैं जब बीमारी आगे बढ़ चुकी होती है, क्योंकि शुरुआती लक्षणों को मामूली समझ लिया जाता है। नीचे दिए संकेत हमेशा कैंसर नहीं होते, पर इन्हें नज़रअंदाज़ न करें।
मुँह का कैंसर
तंबाकू, गुटखा और पान मसाला की वजह से यह हमारे इलाके में बहुत आम है।
- मुँह में छाला या घाव जो 2 हफ़्ते में न भरे
- गाल या जीभ पर सफ़ेद या लाल धब्बा
- मुँह खोलने में दिक्कत, गले में गाँठ
स्तन कैंसर
- स्तन या बगल में गाँठ (दर्द हो या न हो)
- निप्पल से खून या पानी आना, निप्पल अंदर मुड़ना
- त्वचा में गड्ढे या संतरे के छिलके जैसा दिखना
गर्भाशय-ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर
- माहवारी के बीच, संबंध के बाद या मेनोपॉज़ के बाद खून आना
- बदबूदार सफ़ेद पानी
- 30 साल के बाद नियमित पैप/HPV जाँच कराएँ
फेफड़े का कैंसर
- 3 हफ़्ते से ज़्यादा खाँसी, बलगम में खून
- साँस फूलना, सीने में दर्द
- बीड़ी-सिगरेट पीने वालों को ख़ास ध्यान रखना चाहिए
पेट और आँत का कैंसर
- बिना वजह वज़न घटना, भूख न लगना
- मल में खून या काला मल
- लगातार पेट दर्द, निगलने में दिक्कत
क्या करें
- घबराएँ नहीं, पर देर भी न करें।
- किसी कैंसर विशेषज्ञ को दिखाएँ। वे सही जाँच बताएँगे।
- पुरानी सभी रिपोर्ट साथ ले जाएँ।
- आयुष्मान कार्ड हो तो साथ रखें।
ज़ेनहील में जाँच और परामर्श
ज़ेनहील कैंसर हॉस्पिटल, वाराणसी और प्रयागराज में कैंसर विशेषज्ञ उसी दिन अपॉइंटमेंट पर मिलते हैं। कॉल करें: +91 99307 09000। अलग-अलग कैंसर के बारे में पढ़ें: मुँह का कैंसर, स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, फेफड़े का कैंसर।